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पहाड़ का बेमिसाल किसान..गांव में लगाया मशरूम प्लांट

पलायन को मजबूरी का नाम देने वाले लोगों को नैनीताल के काश्तकार लाल सिंह धपोला से सीख लेने की जरूरत है। कोरोना काल में जब पहाड़ के हजारों युवा अनिश्चितता भरे माहौल में निराशा का सामना कर रहे थे। उस वक्त लाल सिंह अपने क्षेत्र में हाईटेक मशरूम प्लांट स्थापित करने में व्यस्त थे, ताकि खुद के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकें। अब उनके करीब पौन बीघा क्षेत्र में तैयार प्लांट में उत्पादन की पहली फसल आ चुकी है, जिसे लेकर वो बेहद उत्साहित हैं। लाल सिंह धपोला लालकुआं क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने करीब पौन बीघा क्षेत्र में एक रूम तैयार कर वहां मशरूम प्लांट लगाया है। सबसे अच्छी बात ये है कि इस प्लांट में पूरे सालभर मशरूम का उत्पादन होता है। ये प्लांट पूरी तरह एयर कंडीशंड है। प्लांट के जरिए लाल सिंह ने ना सिर्फ खुद के लिए आय का संसाधन तैयार किया, बल्कि इसके जरिए 12 से ज्यादा युवाओं को रोजगार भी दिया है। गंगारामपुर हल्दूचौड़ में रहने वाले लाल सिंह बताते हैं कि प्लांट के निर्माण में एक करोड़ की लागत आई। उन्हें इसके लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के हॉर्टिकल्चर मिशन फॉर नार्थ ईस्ट एवं हिमालयन स्टेट्स योजना के तहत मदद मिली है।

अभी मशरूम का एक और समूह पौधे से निकल रहा है। निवासी, लाल सिंह, कहते हैं कि तालाबंदी के दौरान एक कार्य आपातकाल था। ऐसी अवधि में, उन्होंने कुछ पूरा करने पर विचार किया, जो लगातार भुगतान प्राप्त करेगा। यहीं से उन्हें मशरूम विकसित करने का प्लांट लगातार स्थापित करने की योजना मिली। उन्होंने अपनी कल्पना को सतह पर ले जाने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा नियंत्रित की जा रही योजनाओं का अतिरिक्त रूप से शोषण किया। इन लाइनों के साथ, संयंत्र तैयार किया गया था। यहां मशरूम का प्राथमिक समूह छोड़ दिया है। जिसकी कीमत लगभग सात लाख रुपये है। लगातार तीन से पांच क्विंटल मशरूम मंडी से निकालकर मंडी में बेचा जा रहा है। मशरूम की लागत अतिरिक्त रूप से स्वीकार्य हो रही है।

मुख्य क्लस्टर पर 50 क्विंटल मशरूम की पैदावार होती है। यह हाईटेक प्लांट एक साल में मशरूम के 6 ट्रांसफर करेगा। रविवार को, ग्रामीण शोधकर्ताओं ने इसी तरह संयंत्र की समीक्षा की। इसके अतिरिक्त मशरूम निर्माण के दौरान उठाए जाने वाले बीमाों के बारे में शिक्षित किया गया।

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