Breaking News
Home / खबरे / गढ़वाल की दो शिक्षिकाओं का बेमिसाल काम..

गढ़वाल की दो शिक्षिकाओं का बेमिसाल काम..

‘मेरा विद्यालय, मेरा गौरव’। धारकोट प्राथमिक स्कूल की दीवार पर लिखी इस पंक्ति को यहां की दो शिक्षिकाओं ने अपने जीवन में उतार लिया। साफ-सुथरे क्लासरूम, सामाजिक संदेशों से सजी दीवारें और स्वच्छ स्कूल परिसर। ये तस्वीरें यमकेश्वर के प्राथमिक विद्यालय की हैं। कहने को ये सरकारी स्कूल है, लेकिन पढ़ाई और सुविधाओं के मामले में प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देता है। धारकोट के प्राथमिक विद्यालय का ये कायाकल्प देखकर आप भी हैरान हुए बिना नहीं रह सकेंगे। स्कूल की हालत में ये बदलाव कैसे हुआ, चलिए बताते हैं। स्कूल के कायाकल्प का श्रेय यहां की दो शिक्षिकाओं को जाता है। इन दोनों शिक्षिकाओं ने लॉकडाउन में ना सिर्फ अपने शिक्षक होने का फर्ज निभाया, बल्कि विद्यालय को एक आदर्श रूप देने में भी मदद की।

आज ये दोनों अपनी मेहनत और लगन के बूते पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं, लोगों की सराहना पा रही हैं। यमकेश्वर ब्लॉक में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय धारकोट की हालत भी पहले दूसरे सरकारी स्कूलों की तरह हुआ करती थी। प्रधानाध्यापिका रेखा शर्मा और सहायक अध्यापिका सुनीता नेगी स्कूल की हालत सुधारना चाहती थीं, इसे बेहतर बनाना चाहती थीं, लेकिन ना तो समय था और ना ही संसाधन। तभी मार्च में लॉकडाउन लग गया। सभी शिक्षक घर लौट गए। रेखा शर्मा और सुनीता नेगी के पास भी ये विकल्प था, लेकिन इन दोनों ने इस समय का इस्तेमाल स्कूल की हालत सुधारने में किया। जून में इन्होंने स्कूल का सौंदर्यीकरण कराया। इसके लिए सरकार द्वारा दी गई अनुदान राशि का इस्तेमाल किया, अपने स्तर से भी संसाधन जुटाए। आज इनकी मेहनत को पूरा क्षेत्र सलाम कर रहा है।

हेड रेखा शर्मा कहती हैं कि हमें पब्लिक अथॉरिटी से मिले अवार्ड के साथ, हमने स्कूल की स्थिति में सुधार किया। बाद में, हमें बदले हुए स्कूल बहाली के तहत एक पुरस्कार मिला। इससे स्कूल में कई काम किए गए। पब्लिक अथॉरिटी द्वारा स्कूल के लिए 2 लाख 80 हजार रुपये की खर्च योजना बनाई गई थी। अब तक, धर्मकोट स्कूल में 30 बच्चे केंद्रित हैं। स्कूल में युवाओं के अंदर और बाहर सुधार के लिए पूर्ण विचार दिया जाता है। मुख्य प्रशिक्षक और साथी शिक्षक के बीच बेहतर सहयोग के कारण, यह विद्यालय पूरे राज्य में प्रशिक्षण और सौंदर्यीकरण का एक आदर्श मामला बन गया है। व्यक्ति इन दोनों शिक्षकों के कठिन काम का मूल्यांकन कर रहे हैं, उन्हें सलाम कर रहे हैं। राज्य ऑडिट समूह से इन दोनों प्रशिक्षकों के लिए आपको बहुत अधिक बाध्य किया गया है

About kunal lodhi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *